Saturday, 20 August 2022

|| श्री मां दुर्गा चालीसा || Sri Maa Durga Chalisa ||


|| श्री माँ दुर्गा चालीसा || 

-----------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

ॐ सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके
शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते

=============================================================================

नमो नमो दुर्गे सुख करनी नमो नमो अंबे दुःख हरनी

निरंकार है ज्योति तुम्हारी । तिहूँ लोक फैली उजियारी 

शशि ललाट मुख महाविशाला ।  नेत्र लाल भृकुटि विकराला 
रूप मातु को अधिक सुहावे । दरश करत जन अति सुख पावे 
तुम संसार शक्ति लै कीना  पालन हेतु अन्न धन दीना 
अन्नपूर्णा हुई जग पाला । तुम ही आदि सुन्दरी बाला 
प्रलयकाल सब नाशन हारी  तुम गौरी शिवशंकर प्यारी 
शिव योगी तुम्हरे गुण गावें । ब्रह्मा विष्णु तुम्हें नित ध्यावें  
रूप सरस्वती को तुम धारा  दे सुबुद्धि ऋषि मुनिन उबारा 
धरयो रूप नरसिंह को अम्बा । परगट भई फाड़कर खम्बा 
रक्षा करि प्रह्लाद बचायो हिरण्याक्ष को स्वर्ग पठायो 
लक्ष्मी रूप धरो जग माहीं । श्री नारायण अंग समाहीं  
क्षीरसिन्धु में करत विलासा  दयासिन्धु दीजै मन आसा 
हिंगलाज में तुम्हीं भवानी । महिमा अमित  जात बखानी 
मातंगी अरु धूमावति माता  भुवनेश्वरी बगला सुख दाता 
श्री भैरव तारा जग तारिणी । छिन्न भाल भव दुःख निवारिणी  
केहरि वाहन सोह भवानी  लांगुर वीर चलत अगवानी 
कर में खप्पर खड्ग विराजै । जाको देख काल डर भाजै 
सोहै अस्त्र और त्रिशूला  जाते उठत शत्रु हिय शूला 
नगरकोट में तुम्हीं विराजत । तिहुँलोक में डंका बाजत  
शुम्भ निशुम्भ दानव तुम मारे  रक्तबीज शंखन संहारे 
महिषासुर नृप अति अभिमानी । जेहि अघ भार मही अकुलानी 
रूप कराल कालिका धारा  सेन सहित तुम तिहि संहारा 
परी गाढ़ सन्तन पर जब जब । भई सहाय मातु तुम तब तब  
अमरपुरी अरु बासव लोका  तब महिमा सब रहें अशोका 
ज्वाला में है ज्योति तुम्हारी । तुम्हें सदा पूजें नरनारी 
प्रेम भक्ति से जो यश गावें  दुःख दारिद्र निकट नहिं आवें 
ध्यावे तुम्हें जो नर मन लाई । जन्ममरण ताकौ छुटि जाई  
जोगी सुर मुनि कहत पुकारी  योग  हो बिन शक्ति तुम्हारी 
शंकर आचारज तप कीनो । काम अरु क्रोध जीति सब लीनो 
निशिदिन ध्यान धरो शंकर को  काहु काल नहिं सुमिरो तुमको 
शक्ति रूप का मरम  पायो । शक्ति गई तब मन पछितायो  
शरणागत हुई कीर्ति बखानी  जय जय जय जगदम्ब भवानी 
भई प्रसन्न आदि जगदम्बा । दई शक्ति नहिं कीन विलम्बा 
मोको मातु कष्ट अति घेरो  तुम बिन कौन हरै दुःख मेरो 
आशा तृष्णा निपट सतावें । मोह मदादिक सब बिनशावें  
शत्रु नाश कीजै महारानी  सुमिरौं इकचित तुम्हें भवानी 
करो कृपा हे मातु दयाला । ऋद्धिसिद्धि दै करहु निहाला 
जब लगि जिऊँ दया फल पाऊँ  तुम्हरो यश मैं सदा सुनाऊँ 
श्री दुर्गा चालीसा जो कोई गावै । सब सुख भोग परमपद पावै 
देवीदास शरण निज जानी  कहु कृपा जगदम्ब भवानी 

---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

|| दोहा: ||

शरणागत रक्षा करे, भक्त रहे नि:शंक ।

मैं आया तेरी शरण में, मातु लिजिये अंक 


॥ इति श्री दुर्गा चालीसा सम्पूर्ण ॥



No comments:

Post a Comment