Thursday, 7 May 2015

Seventh House - Marriage (सप्तम भाव - विवाह एक पवित्र बंधन )

Seventh House  - सप्तम भाव

(विवाह - एक विवाह या बहुविवाह,  पति / पत्नी,  पति - पत्नी का स्वाभाव और पारस्परिक सम्बन्ध, ससुराल से धन-प्राप्ति, प्रेम आदि


कुंडली में बारहो भाव की रचना महाऋषियों ने सोच-विचार कर की हैं |  मानव के स्वयं का अस्तित्व संसार में सर्वाधिक महत्वपूर्ण हैं | यदि वह स्वयं नहीं है, तो  फिर संसार के सभी प्रदार्थ उसके लिए शून्य  के  बराबर हैं, इसलिए लग्न का आधार जातक को स्वयं ही रखता हैं |

कुंडली में चार केंद्र-स्थान हैं, जिसको सर्वाधिक महत्व दिया गया हैं|  वे भाग हैं - लग्न, चतुर्थ भाव, सप्तम भाव, और दसम भाव |  जहाँ  लग्न मानव के स्वयं के व्यक्तित्व को दर्शाता है, वहाँ यदि उसके बराबर ठीक सामने बैठने वाला व्यक्ति हैं - तो वह है पत्नी, सहचरी जीवन में, सुख-दुःख में समभागी, अर्धांगनी | इसलिए सप्तम भाव से पत्नी (स्त्री की कुंडली हो तो पति) उसका  स्वरुप, उसका स्वाभाव, पति - पत्नी का  पारस्परिक सम्बन्ध, प्रेम आदि का अध्यन किया जाता है| सातम भाव काफी महत्वपूर्ण हैं, क्योकि कुंडली में यदि सातम भाव न हो अथवा कमज़ोर हो तो जातक का जीवन अपूर्ण एवं अकेला ही रह जायेगा |

जीवन में स्वयं व सहचरी के अतिरिक्त्त दो मुख्या बिंदु और हैं | वे हैं - माता और पिता | माता-पिता का ऋण सदा रहता हैं, क्योकि इन्होने ही जातक को संसार में सांस लेने के योग्य बनाया | इसमे भी माता का स्थान सर्वोच्च हैं |  इसलिए माता का स्थान चतुर्थ भाव रखा तथा दसम भाव पिता को दिया गया हैं |

महत्वपूर्ण तथय्:
House
 Signifies
2nd
Family  (परिवार)
5th
Love, Romance (प्यार)
7th
Marriage (विवाह)
8th
Longevity  (लंबी उम्र)
11th
Desires fulfillment (इच्छा पूर्ति)
12th
Bed comports and pleasures बिस्तर आराम और सुख

1.  यदि शुक्र (Venus) उच्च का हो कर केन्द्रस्थ हो, अर्ताथ  सप्तम भाव (7th House) में मीन  का शुक्र (Venus) हो,  तो जातक का दाम्पत्य-जीवन उच्चस्तर होगा |  क्योकि शुक्र भाग्य और धन भाव का भी स्वामी होगा, तो उस जातक का भाग्य ससुराल से बनेगा और वही से उसे धन-प्राप्ति होगी |

2. यदि गुरु (Jupiter) उच्च का हो कर सप्तम भाव (7th House) में हो, अर्ताथ  सप्तम भाव में कर्क का  गुरु हो, तो जातक को सुन्दर एवं कुलीन पत्नी / पति मिलेगा |

3. यदि सप्तम भाव में मकर का शनि  हो, तो वह स्वग्रही सप्तम भाव में होगा एवं मारक आठवें भाव में होगा | इस प्रकार वह पूर्ण मारक ग्रह बन जायेगा और क्योकि वह सप्तम भाव में बैठा हैं, तो फलस्वरूप शनि जातक के वैवाहिक-जीवन को पूर्णतः बर्बाद कर देगा |

4. सातवे भावे में मकर का गुरु हो तो उसे स्त्री का सुख अल्प ही मिलता हैं |

5. सातम भाव में शुक्र, चन्द्र, बुध, गुरु ये सब या इनमे से जो भी ग्रह होता हैं, उस ग्रह के स्वाभाव की ही स्त्री होती हैं|

By B.N.Pandit

   

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